सियासत पर नजर, फतेहपुर
मौसम पूर्वानुमान ( वैधता: दिनांक 06 सितंबर, 2023 से 10 सितंबर, 2023 तक)
वसीम खान, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि मौसम विज्ञान,
कृषि विज्ञान केंद्र, फतेहपुर
(यश द्विवेदी, ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)
(हर खबर पर हमारी पकड़)
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी अगले 5 दिनों के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार फतेहपुर जिले में दिनांक 06 से 10 सितंबर तक मध्यम से घने बादल छाये रहने की संभावना रहेगी, जिसके कारण दिनांक 6 से 10 सितंबर के बीच में गरज/चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना रहेगी। अधिकतम तापमान 31.0 से 33.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा जबकि न्यूनतम तापमान 20.0 से 23.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा। हवा की दिशा उत्तर-पूर्वी रहेगी और हवा की गति सामान्य बने रहने की संभावना हैं।
किसानों को सूचित किया जाता है कि अगले पांच दिनों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना को देखते हुए, धान की फसल को छोड़कर खरीफ की अन्य सभी फसलों में सिंचाई का कार्य स्थगित रखें। पशुओं को सुबह-शाम नहलाएं, छायादार स्थान पर रखें, 3-4 बार पानी पिलाएं। कीटनाशकों और खरपतवारनाशी रसायनों के लिए, उपकरणों को धोने के लिए केवल साफ पानी का उपयोग करें और हवा के खिलाफ खड़े होकर कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों का छिड़काव न करें। छिड़काव शाम के समय करना चाहिए, यदि संभव हो तो छिड़काव के बाद, खाने से पहले और कपड़े धोने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए।
फ़सल संबंधित सलाह:
• धान की फसल में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई एवं सिंचाई कर उचित नमी बनाए रखें। यदि धान में खैरा रोग दिखाई दे तो इसके नियंत्रण के लिए 800 लीटर पानी में 20-25 किलोग्राम जिंक सल्फेट और 2.5 किलोग्राम चूना मिलाकर छिड़काव करें। धान की फसल में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करने से पहले खरपतवार हटा दें तथा टॉप ड्रेसिंग करते समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। धान की फसल में जड़ की सूँडी कीट का प्रकोप होने पर तीन से चार सेंटीमीटर रुके हुए पानी में 20 से 25 किलोग्राम हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रतिशत दानेदार रसायन प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकाव करें। यदि धान की फसल में तना छेदक कीट का प्रकोप हो तो इसके नियंत्रण के लिए क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी 1.5 लीटर/हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर साफ मौसम में छिड़काव करें।
• वर्षा न होने की स्थिति में मक्का की फसल में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई एवं सिंचाई कर उचित नमी बनाए रखें। मक्के की फसल में तना छेदक/शूट मक्खी कीट का प्रकोप होने की संभावना रहती है, अत: इसकी रोकथाम के लिए आसमान साफ होने पर इमैक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 250 ग्राम/हेक्टेयर या डाइमेथोएट 30% ईसी 1.0 लीटर/हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोल तैयार करके छिड़काव करें।
• वर्षा न होने की स्थिति में मूंगफली की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई कार्य कर उचित नमी बनाए रखें। खड़ी फसलों को निराई-गुड़ाई करके तथा खरपतवारों से मल्चिंग करके खरपतवारों से मुक्त रखें। मूंगफली की फसल में सफेद गिडार/दीमक कीट का प्रकोप होने की संभावना है, इसलिए आसमान साफ रहने पर फिप्रोनिल 0.3% जीआर 20 किग्रा/हेक्टेयर की दर से टॉपड्रेसिंग करें। मूंगफली की फसल में नमी की कमी और अधिक तापमान के कारण सूखी जड़ सड़न या चारकोल सड़न रोग लगने की संभावना रहती है, इसलिए इसकी रोकथाम के लिए मूंगफली की फसल में सिंचाई कर उचित नमी बनाए रखें।
• वर्षा न होने की स्थिति में तिल की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई कार्य कर उचित नमी बनाए रखें। खड़ी फसलों को निराई-गुड़ाई करके तथा खरपतवारों से मल्चिंग करके खरपतवारों से मुक्त रखें। तिल की फसल में पत्ती एवं फल की सूंडी का प्रकोप होने की संभावना रहती है अत: इसकी रोकथाम के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 250 ग्राम/हेक्टेयर या क्विनालफॉस 25% ईसी 1. 25 लीटर/हेक्टेयर की दर से 600-700 ली. पानी में घोल बनाकर मौसम साफ होने पर छिड़काव करें।
• वर्षा न होने की स्थिति में उर्द एवं मूंग की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई कार्य कर उचित नमी बनाए रखें। खड़ी फसलों को निराई-गुड़ाई करके तथा खरपतवारों से मल्चिंग करके खरपतवारों से मुक्त रखें। उर्द एवं मूंग की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए इमेजेथापायर 10 एसएल 1.0 लीटर/हेक्टेयर की दर से, बुआई के 15-20 दिन बाद 500-800 लीटर पानी में घोल बनाकर आसमान साफ होने पर छिड़काव करें।पशुपालन:
• किसानों को सलाह दी जाती है कि वे पशुओं को साफ-सुथरी जगह पर रखें और मक्खी-मच्छर से बचाव के लिए पशुओं को धुआं दें। पशुओं को हरे व सूखे चारे के साथ पर्याप्त मात्रा में अनाज दें। पशुओं के पेट में कीड़ों की रोकथाम के लिए औषधि देने का सबसे अच्छा समय है। पशुओं को गलाघोंटू एवं लंगड़िया बुखार का टीका लगवाएं। पशुओं को दिन में 3-4 बार साफ एवं ताजा पानी अवश्य पिलायें। पशुओं को दिन में दो से तीन बार नहलाएं। दिन के समय पशुओं को छाया में बांधें तथा पशुओं को पेड़ के नीचे न बांधें। क्योंकि इस सप्ताह हवा की तेज गति के कारण पेड़ों/वृक्षों की टहनियों के गिरने की संभावना अधिक है।

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