सियासत पर नजर, फतेहपुर
मौसम पूर्वानुमान ( वैधता: दिनांक 15 नवंबर, 2023 से 19 नवंबर , 2023 तक)
वसीम खान, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि मौसम विज्ञान,
कृषि विज्ञान केंद्र, फतेहपुर
(यश द्विवेदी, ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)
(हर खबर पर हमारी पकड़)
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 5 दिनों में फतेहपुर जिले में दिनांक 15 नवंबर को हल्के से मध्यम बादल छाए रहने की संभावना रहेंगी लेकिन इसके कारण वर्षा की कोई संभावना नहीं रहेगी। अधिकतम तापमान 28.0 से 30.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा जबकि न्यूनतम तापमान 14.0 से 15.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा। हवा की दिशा अधिकतर उत्तर-पूर्वी रहेगी और हवा की गति सामान्य बने रहने की संभावना हैं।
किसानों को सलाह दी जाती है कि मौसम खड़ी खरीफ फसलों की कटाई/मड़ाई और गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, सरसों, अलसी, आलू और सब्जियों जैसी रबी फसलों की बुआई के लिए अनुकूल है। रबी मौसम में बोई जाने वाली फसलें जैसे चना, मटर, मसूर, सरसों और अलसी आदि को बीज उपचार के बाद ही बोना चाहिए। पशुओं को सुबह-शाम नहलाएं, छायादार स्थान पर रखें, पानी दें 3-4 बार। कीटनाशकों, शाकनाशियों और खरपतवारनाशकों के लिए, उपकरणों को धोने के लिए केवल साफ पानी का उपयोग करें और हवा की विपरीत दिशा में खड़े होकर कीटनाशकों, कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों का छिड़काव न करें। छिड़काव शाम को करना चाहिए; यदि संभव हो तो छिड़काव के बाद, खाने से पहले और कपड़े धोने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए।
फ़सल संबंधित सलाह:
• धान की फसल की कटाई करें और कटाई के बाद 3-4 दिन तक धूप में सुखाकर मड़ाई करके बीज को धूप में सुखाकर बीज का भण्डारण करें।
• मौसम के अनुसार सिंचित अवस्था में गेहूं की बुआई के लिए तापमान अनुकूल है, इसलिए गेहूं की बुआई 10 नवंबर से शुरू कर देनी चाहिए. गेहूं एवं क्षेत्रीय प्रजातियों पी बी डब्लू-723, HPBW-01, DBW-39, K.-9107, K.-1006, K.-402, K.-607, DBW-90, WB-02, NW-5054, एच.डी.-3043, यू.पी.-2382, एच.यू. W-468, PBW-443, HD 2967 आदि की बुआई हेतु खेत तैयार करें। कटाव वाली भूमि के लिए अनुशंसित प्रजातियाँ:- KRL-210, KRL-213, K.-1317 आदि किसी भी प्रजाति की बुआई हेतु खाद एवं बीज की व्यवस्था करनी चाहिए।
• मूंगफली की फसल की खुदाई तभी करनी चाहिए जब छिलके के ऊपर की नसें उभर आएं और अंदर का भाग भूरे रंग का हो जाए तथा मूंगफली गुलाबी हो जाए। मूंगफली की कटाई के बाद फलियों को धूप में अच्छी तरह सुखाकर भंडारण कर लें।
• तोरिया की फसल में बालों वाली इल्ली का प्रकोप होने की संभावना रहती है इसलिए इसकी रोकथाम के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 200 ग्राम/हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। तोरिया की फसल की बुआई के 20-22वें दिन पौधे से पौधे की दूरी 10-22 सेंटीमीटर के अंदर निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। तोरिया की फसल में पहली सिंचाई बुआई के 25-30 दिन के अन्दर करनी चाहिए तथा जई आने पर 108 किग्रा/हेक्टेयर की दर से यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करें।
• सरसों की फसल में आरा मक्खी - ये कीट अंकुरण के 7 से 10 दिन में अधिक हानि पहुंचाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत या मैलाथियान 5 प्रतिशत या कार्बारिल 5 प्रतिशत का चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह या शाम को दें। राई/सरसों की किसी भी प्रजाति की बुआई के लिए अनुशंसित प्रजातियाँ- बरुना, रोहिणी, नरेन्द्र राय- 8501, माया, वैभव आदि की बुआई 4-5 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर की दर से मौसम साफ होने पर करें।
• मटर की फसल की किसी भी अनुशंसित किस्म - रचना, मालवीय मटर-15, सपना आदि की बुआई के लिए 100-125 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर की दर से बुआई करें।
• चने की किसी भी किस्म की बुआई के लिए फसल अनुशंसित प्रजातियाँ- आवारोधी, पूसा256, पूसा-362, के.डब्लू.आर-108, के-850, के.डी.जी.-1168 आदि। छोटे दाने वाले बीज 75-80 किग्रा/हेक्टेयर। बड़े दाने वाले बीज के लिए 90-100 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर की दर से बुआई करें।
• टमाटर, प्याज, फूलगोभी और पत्तागोभी की नर्सरी डालें और तैयार पौधों को मेड़ों पर रोपें। यदि सब्जी की फसलों में फल छेदक/पत्ती छेदक कीट का प्रकोप दिखाई दे तो इसके नियंत्रण के लिए नीम के तेल को 1.5 मिली/लीटर पानी में घोल बनाकर 8-10 दिन के अंतराल पर 3-4 छिड़काव करें। सब्जी मटर, मूली, गाजर, सौंफ, अजवाइन, चुकंदर, लहसुन, धनिया, पालक, सोया और मेथी की बुआई शुरू करें। आलू की बुआई के लिए खेत तैयार करें।
पशुपालन:
• किसानों को सलाह दी जाती है कि वे गर्भवती भैंसों/गायों को ढलान वाले स्थानों पर न बांधें। गर्भवती भैंस/गाय को पौष्टिक चारा व अनाज खिलाएं तथा नवजात शिशु को तीन दिन तक कोलोस्ट्रम खिलाएं। पशुओं को साफ-सुथरी जगह पर रखें। पशुओं को गला घोटू से बचाने के लिए टीकाकरण अवश्य कराएं। बदलते मौसम को देखते हुए रात के समय पशुओं को खुले स्थानों पर न बांधें तथा पशुओं के स्वास्थ्य एवं बीमारी का ध्यान रखना सुनिश्चित करें। पशुओं को हरे एवं सूखे चारे के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में अनाज उपलब्ध करायें। पशुओं को दिन में 3-4 बार साफ एवं ताजा पानी अवश्य पिलायें।

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