फतेहपुर का मौसम ( वैधता: दिनांक 04 मई, 2024 से 08 मई, 2024 तक)

सियासत पर नजर, फतेहपुर 
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मौसम पूर्वानुमान ( वैधता: दिनांक 04 मई, 2024 से 08 मई, 2024 तक)

: वसीम खान, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि मौसम विज्ञान, कृषि विज्ञान केंद्र, फतेहपुर
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 5 दिनों में फतेहपुर जिले में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने की संभावना रहेगी। लेकिन इसके कारण बारिश की संभावना नहीं रहेगी। दोपहर के समय तेज़ हवा या धूल भरी आंधी चलने की संभावना रहेगी। अधिकतम तापमान 40.0 से 43.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा जबकि न्यूनतम तापमान 24.0 से 26.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा। हवा की दिशा अधिकतर उत्तर-पश्चिमी होगी और हवा की गति सामान्य से तेज बने रहने की संभावना हैं।

किसानों को सलाह दी जाती है कि रबी फसलों की कटाई और मड़ाई से पहले मौसम की स्थिति की जांच कर लें। मूंग, मक्का, उर्द एवं मूंगफली जैसी फसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई करके उचित नमी बनाए रखें। पकी फसलों की कटाई के दौरान किसानों और मजदूरों को खेतों में पानी की बोतलें ले जानी चाहिए। खेत से काटी गई सब्जियाँ जैसे टमाटर, फूलगोभी, हरी पत्तेदार, खीरा और अन्य कद्दूवर्गीय सब्जियाँ सीधे नजदीकी बाजार में भेजें। कीटनाशकों और शाकनाशी रसायनों का उपयोग करते समय, उपकरण को केवल साफ पानी से अलग से धोएं। हवा की विपरीत दिशा में खड़े होकर स्प्रे करें। यदि संभव हो तो छिड़काव शाम के समय करना चाहिए। छिड़काव के बाद खाने या कपड़े धोने से पहले हाथों को साबुन या हैंड सैनिटाइजर से अच्छी तरह धोना चाहिए।
फ़सल संबंधित सलाह:
• गेहूं की पकी हुई फसल की गहाई कर कटाई का कार्य करें। गेहूं की फसल की कटाई के बाद गट्ठर अवश्य बांध देना चाहिए ताकि तेज हवा के कारण ताला न उड़े तथा मड़ाई शाम के समय तथा रात के समय जब हवा ठंडी हो तो करनी चाहिए। भंडारण के लिए गेहूं को कड़ी धूप में सुखाना चाहिए ताकि नमी की मात्रा 8 -10% से अधिक न हो। भंडारण से पहले स्प्रूस या भंडारण गृह को कीटनाशकों से कीटाणुरहित करें।
• सुनिश्चित करें कि मक्के की फसलें खरपतवार मुक्त रहें और उचित नमी का स्तर बनाए रखते हुए आवश्यकतानुसार हर 12-15 दिनों में सिंचाई करें। मक्के की फसल में संभावित तना छेदक या शूट फ्लाई कीट के प्रकोप को रोकने के लिए, इमैक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 4 ग्राम/हेक्टेयर या डाइमेथोएट 30% ईसी 1.0 लीटर/हेक्टेयर, 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव के माध्यम से डालें।
• सुनिश्चित करें कि उर्द की फसल खरपतवार मुक्त रहे और पर्याप्त नमी का स्तर बनाए रखते हुए उनकी आवश्यकता के अनुसार हर 15-20 दिनों में सिंचाई करें। इन फसलों में थ्रिप्स या हरे कीट के संभावित प्रकोप को रोकने के लिए, ऑक्सीडेमेटन-मिथाइल 25% ईसी या डाइमेथोएट 30% ईसी को 1.0 लीटर/हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
• मूंग की फसल में पहली सिंचाई के 25-30 दिन बाद बुआई तथा शेष सिंचाई आवश्यकतानुसार 12 -15 दिन के अन्तराल पर करते रहना चाहिए तथा उचित नमी बनाये रखना चाहिए।
• प्याज की फसल में डैम्पिंग ऑफ, जो कि बहुत अधिक नमी के कारण होने वाली बीमारी है, को रोकने के लिए हर 15 दिन में शाम को कार्बेन्डाजिम (1 ग्राम/लीटर पानी) या मैन्कोजेब (2.5 ग्राम/लीटर पानी) का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। इसके अतिरिक्त, गर्मी के मौसम में, सब्जियों, टमाटर, बैंगन और मिर्च की फसलों की नियमित रूप से निराई करना महत्वपूर्ण है।
• आम, अमरूद, नींबू, बेर, अंगूर, पपीता और लीची के बगीचों में फलों को पेड़ों से गिरने से बचाने के लिए, बगीचों की सिंचाई करने या 15 पीपीएम एसिटिक एसिड या 4 मिलीलीटर प्लेनोफिक्स प्रति 9 लीटर पानी के घोल का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। इससे उक्त बगीचों में सिंचाई कार्य में मदद मिलेगी।पशुपालन:
• वर्तमान मौसम की स्थिति को देखते हुए किसान अपने पशुओं को रात के समय खुले में न बांधें। इसके बजाय, दिन के दौरान उन्हें छायादार जगह पर बांध दें। इन्हें पेड़ों के नीचे बांधने से बचें क्योंकि इस सप्ताह तेज हवाओं के कारण टहनियाँ और पेड़ गिरने का खतरा अधिक है। खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए पशुओं को टीका लगवाने की सलाह दी जाती है। पशुओं को पर्याप्त मात्रा में अनाज के साथ-साथ हरा एवं सूखा चारा भी उपलब्ध करायें। सुनिश्चित करें कि जानवरों को दिन में कम से कम 3-4 बार साफ और ताजा पानी मिले। गर्भवती पशुओं को ढलान वाले क्षेत्रों में बांधने से बचें। पशुओं के पेट में कीड़ों की रोकथाम के लिए कृमिनाशक दवा देने का सर्वोत्तम समय अनुशंसित है।

(ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)

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