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फतेहपुर मौसम पूर्वानुमान: 10 से 14 जुलाई तक मध्यम से घने बादल, गरज और बारिश की संभावना
मौसम पूर्वानुमान ( वैधता: दिनांक 10 जुलाई, 2024 से 14 जुलाई, 2024 तक)
वसीम खान, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि मौसम विज्ञान, कृषि विज्ञान केंद्र, फतेहपुर
भारतीय मौसम विभाग ने पूर्वानुमान लगाया है कि फतेहपुर जिले में 10 जुलाई से 14 जुलाई तक मध्यम से घने बादल छाए रहेंगे, इस दौरान गरज/बिजली चमकने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। अधिकतम तापमान 32.0 से 37.0 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 24.0 से 29.0 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। हवा की दिशा दक्षिण-पश्चिमी से दक्षिण-पूर्वी रहने की उम्मीद है, हवा की गति सामान्य होगी।
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे तैयार धान की पौध रोप दें। बारिश न होने की स्थिति में खरीफ की मक्का, मूंगफली, ज्वार, तिल, अरहर आदि की बुआई करें। पशुओं को सुबह-शाम नहलाएं, छायादार स्थान पर रखें तथा दिन में 3-4 बार पानी पिलाएं। कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों का उपयोग करते समय, हमेशा साफ पानी का उपयोग करके उपकरणों को धोएँ और हवा की विपरीत दिशा में खड़े होकर छिड़काव करने से बचें। शाम के समय इन दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। छिड़काव के बाद, खाने से पहले और कपड़े धोने के बाद अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना सुनिश्चित करें।
फ़सल संबंधित सलाह:
• यदि वर्षा न हो तो सिंचाई के माध्यम से उचित नमी बनाए रखें। धान की पौध रोपने के लिए खेत तैयार करें तथा 22-25 दिन की आयु वाले धान की पौध रोपें। वर्षा जल को रोकने के लिए खेत की मेड़ों को मजबूत करें। धान की फसल में चौड़ी व संकरी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए अनिलोफॉस 30 प्रतिशत ई.सी. या प्रेटलाक्लोर 1.25 लीटर/हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर रोपाई के 2-3 दिन के अंदर छिड़काव करें, जिससे 2-3 इंच पानी बना रहे। यदि धान में खैरा रोग दिखाई दे तो उसके नियंत्रण के लिए 20-25 किग्रा जिंक सल्फेट व 2.5 किग्रा चूना के मिश्रण को 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
• बारिश न होने की स्थिति में किसानों को बुवाई जारी रखनी चाहिए। खरीफ मूंगफली की संकर किस्में जैसे चित्रा, कौशल, प्रकाश, अंबर, उत्कर्ष, दिव्या तथा गुच्छा किस्में जैसे चंद्रा, टा-28, 64 एम-13 आदि की बुवाई करने की सिफारिश की गई है। मूंगफली की बुवाई के लिए आसमान साफ रहने पर 70-80 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की सिफारिश की गई है।
• बारिश न होने की स्थिति में किसान भाईयों को चाहिए कि वे तिल की फसल की अनुशंसित किस्मों जैसे टाइप-4, 12, 13, टाइप-78, शेखर, प्रगति, तरुण, आर.टी.-351, आर.टी.-346 में से किसी एक की बुवाई आसमान साफ होने पर करें।
• वर्षा न होने की स्थिति में खरीफ में बोई गई बैंगन, मिर्च, अगेती फूलगोभी, पत्तागोभी आदि की तैयार पौध की रोपाई करें। भिण्डी, लोबिया, कद्दू, लौकी, तुरई, करेला, खीरा आदि की बुवाई करें। कद्दू, लौकी, करेला, खीरा, तरबूज, खरबूजा आदि की तैयार फसलों की कटाई कर बाजार भेजें। सब्जी की फसलों में फल छेदक/पत्ती छेदक कीटों की रोकथाम के लिए नीम तेल (1.5-2.0 मिली/लीटर) पानी में घोल बनाकर 8-10 दिन के अन्तराल पर 3-4 बार छिड़काव करें। खड़ी सब्जी की फसलों में आकाश साफ होने पर निराई-गुड़ाई करें।
• पके हुए आम के फलों को तोड़कर बाजार में भेज दें। नए बागों में रोपाई के लिए गड्ढे खोदकर उन्हें खुला छोड़ दें।
पशुपालन:
• किसानों को भारी बारिश के दौरान पशुओं को नदियों, नहरों और तालाबों से दूर रखने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। पशुओं को पर्याप्त मात्रा में अनाज, हरा और सूखा चारा दें। पशुओं के पेट में कीड़े होने से रोकने के लिए कृमिनाशक दवा देने का यह आदर्श समय है। एंथ्रेक्स और डेंगू बुखार के खिलाफ पशुओं को टीका लगवाएं। सुनिश्चित करें कि पशुओं को दिन में 3-4 बार साफ और ताजा पानी मिले। पशुओं को दिन में दो से तीन बार नहलाएं और दिन के समय उन्हें छायादार जगह पर बांधकर रखें, इस सप्ताह तेज हवाओं में पेड़ों की टहनियाँ गिरने की संभावना के कारण उन्हें पेड़ों के नीचे न बांधें। गर्भवती पशुओं को ढलान वाली जगहों पर न बांधें।
(ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)

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