स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही: एनएम गीता उत्तम पर जच्चा-बच्चा की मौत का आरोप, 2018 का मामला फिर चर्चा में

सियासत पर नजर, फतेहपुर 

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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही: एनएम गीता उत्तम पर जच्चा-बच्चा की मौत का आरोप, 2018 का मामला फिर चर्चा में

फतेहपुर: जच्चा बच्चा की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की एनएम गीता उत्तम पर आरोप लगे हैं और प्रथम दृष्टया रिपोर्ट में उन्हें दोषी पाया गया है। वर्ष 2018 में भी क्राइम नम्बर 0684/18 धारा 304-A के तहत सदर कोतवाली में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, बावजूद इसके, आरोपी गीता उत्तम के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। 


इस मामले में वादी सन्दीप को न्याय नहीं मिल सका। वह लगातार पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के चक्कर लगाते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यदि उस समय कार्यवाही हो गई होती तो शायद "बन्द करो मौत के अस्पताल" जैसी घटनाओं पर अंकुश लग सकता था। 

सूत्रों के अनुसार, मकनपुर गांव के एक पीड़ित ने भी इसी तरह की शिकायत थाने में दी थी, लेकिन रसूखदार होने की वजह से वह एप्लिकेशन धूल खाती रही और कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। 

बताया जाता है कि एनएम गीता के पति भी मरीजों का इलाज करते आए हैं और उनके वीडियो भी लोगों के पास मौजूद हैं। इस नए मामले में भी अब तक कोई कार्रवाई न होने से स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 

एनएम गीता ने अपने घर में जच्चा बच्चा का इलाज किया और जब स्थिति बिगड़ी, तो उसे वीआईपी रोड के एक निजी नर्सिंग होम पर ले जाया गया। यहाँ भी इलाज शुरू हुआ और जब स्थिति गंभीर हो गई, तो कानपुर के लिए रेफर किया गया। 

अब सवाल उठता है कि क्या इस निजी नर्सिंग होम के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी? पूरे मामले में होने वाली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

एनएम के चार साल की नौकरी बची, विवादों में घिरी

फ़तेहपुर : एक चौंकाने वाली ख़बर के अनुसार, सहायक नर्स मिडवाइफ (एनएम) गीता उत्तम, जिनकी नौकरी में अब केवल चार साल बचे हैं, बड़े विवादों में घिर गई हैं। उनके पूरे करियर में व्यक्तिगत लाभ को जनता की सेवा से ऊपर रखा जाने का आरोप है।

लापरवाही और मौतों की जांच:

गीता उत्तम पर लापरवाही का आरोप है, जिसके चलते कई मौतें हुईं। इसके बावजूद, अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। 2018 में उनके खिलाफ 304A के तहत मामला दर्ज हुआ था, लेकिन वे गंभीर परिणामों से बचने में सफल रहीं।

घूस और दबाव की रणनीतियां:

रिपोर्ट्स के अनुसार, डिलीवरी के दौरान माताओं और बच्चों की मौत के मामलों में गीता उत्तम ने पीड़ित परिवारों को बाहर अदालत से सुलह के लिए मोटी रकम देने की पेशकश की। दबाव और घूस का इस्तेमाल कर मामलों को दबाने की बात सामने आई है।

अवैध गतिविधियां और संपत्ति:

गीता उत्तम पर अवैध डिलीवरी कराने और सरकारी अस्पतालों से मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने का आरोप है, जिससे वे व्यक्तिगत लाभ कमाती रहीं। वर्षों के दौरान, उन्होंने इन गतिविधियों के जरिए कई मकान बनाए और भारी संपत्ति अर्जित की है।

स्वास्थ्य विभाग में प्रणालीगत समस्याएं:

गीता उत्तम के इन आरोपों के बावजूद उनकी नियुक्ति पर सवाल उठते हैं। यह मामला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और जवाबदेही की प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उनके गलत काम के बावजूद इतने लंबे समय तक बचने की स्थिति चिंताजनक है।

जनता का विश्वास हिला:

इन खुलासों से स्थानीय स्वास्थ्य प्रणाली में जनता का विश्वास और भी कमज़ोर हुआ है। अब जनता पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है, ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था में विश्वास बहाल किया जा सके।

आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार:

जांच जारी है और जनता स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है। इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। 

इस विकसित हो रही कहानी पर अधिक अपडेट के लिए जुड़े रहें।


(ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)

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