सियासत पर नजर, फतेहपुर
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फतेहपुर में झोलाछाप डॉक्टरों का जंगलराज: स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवाल
फतेहपुर। जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों का साम्राज्य दिन-ब-दिन फैलता जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव का फायदा उठाकर बिन्दकी, खागा और सदर तहसील के गाँवों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग अवैध रूप से क्लिनिक चला रहे हैं, जिन्हें न तो कोई मेडिकल डिग्री प्राप्त है और न ही इलाज का वैध अधिकार।
झोलाछापों की वजह से हर साल दर्जनों लोगों की जान पर बन आती है। कई गंभीर बीमारियों के मामलों में गलत इलाज के कारण या तो मरीजों की हालत बिगड़ जाती है या फिर जान से हाथ धोना पड़ता है। इसके बावजूद भी फतेहपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन पर कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार कई झोलाछाप डॉक्टर राजनीतिक संरक्षण, घूसखोरी या विभागीय मिलीभगत के चलते न केवल खुलेआम प्रैक्टिस कर रहे हैं बल्कि दवाओं की दुकानों से गैर-कानूनी दवाएं भी मंगवाते हैं।
प्रश्न उठते हैं:
आखिर किसके संरक्षण में फलफूल रहा है यह काला कारोबार?
क्यों नहीं की जाती CMO द्वारा नियमित छापेमारी?
क्या स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी जानबूझकर है?
क्या मानव जीवन से बड़ा हो गया है भ्रष्टाचार?
जनता की मांग:
झोलाछाप डॉक्टरों की सूची तैयार कर अविलंब छापेमारी।
दोषी अधिकारियों पर भी हो कार्रवाई।
ग्रामीण इलाकों में सरकारी चिकित्सा सेवाओं को सशक्त बनाया जाए।
अगर समय रहते इस गोरखधंधे पर लगाम नहीं लगी, तो जनजीवन पर इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ सकता है। शासन और प्रशासन को अब "जानबूझकर अनदेखी" की नीति से बाहर आना होगा।
(न्यूज़ डेस्क फतेहपुर, 9936330179)
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