फतेहपुर का मौसम (दिनांक 18 नवम्बर से 22 नवम्बर 2023)

सियासत पर नजर, फतेहपुर 
मौसम पूर्वानुमान ( वैधता: दिनांक 18 नवंबर, 2023 से 22 नवंबर , 2023 तक)
वसीम खान, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि मौसम विज्ञान,
कृषि विज्ञान केंद्र, फतेहपुर
(यश द्विवेदी, ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)
(हर खबर पर हमारी पकड़)
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 5 दिनों में फतेहपुर जिले में दिनांक 18 से 20 नवंबर तक हल्के बादल छाए रहने की संभावना रहेगी। लेकिन इससे बारिश की संभावना नहीं रहेगी। अधिकतम तापमान 30.0 से 31.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा जबकि न्यूनतम तापमान 14.0 से 15.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा। हवा की दिशा अधिकतर उत्तर-पूर्वी से उत्तर-पश्चिमी होगी और हवा की गति सामान्य बने रहने की संभावना हैं।

किसानों को यह सलाह दी जाती है कि मौसम खड़ी खरीफ फसलों की कटाई/मड़ाई और गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, सरसों, अलसी, आलू और सब्जियों जैसी रबी फसलों की बुआई के लिए अनुकूल है। रबी मौसम में बोई जाने वाली फसलें जैसे चना, मटर, मसूर, सरसों और अलसी आदि को बीज उपचार के बाद ही बोना चाहिए। पशुओं को सुबह-शाम नहलाएं, छायादार स्थान पर रखें, पानी दें 3-4 बार। कीटनाशकों, शाकनाशियों और खरपतवारनाशकों के लिए, उपकरणों को धोने के लिए केवल साफ पानी का उपयोग करें और हवा की विपरीत दिशा में खड़े होकर कीटनाशकों, कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों का छिड़काव न करें। छिड़काव शाम को करना चाहिए; यदि संभव हो तो छिड़काव के बाद, खाने से पहले और कपड़े धोने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए।
फ़सल संबंधित सलाह:
मौसम के अनुसार सिंचित अवस्था में गेहूं की बुआई के लिए तापमान अनुकूल है, इसलिए गेहूं की बुआई 10 नवंबर से शुरू कर देनी चाहिए. गेहूं एवं क्षेत्रीय प्रजातियों पी बी डब्लू-723, HPBW-01, DBW-39, K.-9107, K.-1006, K.-402, K.-607, DBW-90, WB-02, NW-5054, एच.डी.-3043, यू.पी.-2382, एच.यू. W-468, PBW-443, HD 2967 आदि की बुआई हेतु खेत तैयार करें। कटाव वाली भूमि के लिए अनुशंसित प्रजातियाँ:- KRL-210, KRL-213, K.-1317 आदि किसी भी प्रजाति की बुआई हेतु खाद एवं बीज की व्यवस्था करनी चाहिए।
तोरिया की खड़ी फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करनी चाहिए। तोरिया की फसल में बालों वाली इल्ली का प्रकोप होने की संभावना रहती है, अत: इसकी रोकथाम के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 200 ग्राम/हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
सरसों की फसल में आरा मक्खी - ये कीट अंकुरण के 7 से 10 दिन में अधिक हानि पहुंचाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत या मैलाथियान 5 प्रतिशत या कार्बारिल 5 प्रतिशत का चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह या शाम को दें। राई/सरसों की किसी भी प्रजाति की बुआई के लिए अनुशंसित प्रजातियाँ- बरुना, रोहिणी, नरेन्द्र राय- 8501, माया, वैभव आदि की बुआई 4-5 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर की दर से मौसम साफ होने पर करें।
मटर की फसल की किसी भी अनुशंसित किस्म - रचना, मालवीय मटर-15, सपना आदि की बुआई के लिए 100-125 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर की दर से बुआई करें।
चने की किसी भी किस्म की बुआई के लिए फसल अनुशंसित प्रजातियाँ- आवारोधी, पूसा256, पूसा-362, के.डब्लू.आर-108, के-850, के.डी.जी.-1168 आदि। छोटे दाने वाले बीज 75-80 किग्रा/हेक्टेयर। बड़े दाने वाले बीज के लिए 90-100 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर की दर से बुआई करें।
समय पर बोई गई सब्जियों की आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई एवं सिंचाई करनी चाहिए। लहसुन, मूली, मेथी, धनिया, पालक एवं सोया आदि की बुआई शीघ्र पूरी करें। पत्तागोभी एवं फूलगोभी की तैयार पौध की रोपाई करें। यदि सब्जी की फसलों में फल छेदक/पत्ती छेदक कीट का प्रकोप दिखाई दे तो इसके नियंत्रण के लिए नीम के तेल को 1.5 मिली/लीटर पानी में घोल बनाकर 8-10 दिन के अंतराल पर 3-4 छिड़काव करें।
समय पर बोई गई अगेती आलू की फसल की निराई-गुड़ाई करने के बाद खेतों में हल्की सिंचाई करें तथा उचित नमी पर मिट्टी चढ़ा दें। आलू की अगेती फसल में कटवर्म कीट का प्रकोप होने की संभावना रहती है, अत: इसकी रोकथाम के लिए क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी 2.0 लीटर/हेक्टेयर की दर से 700 -800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। आलू की अनुशंसित किस्में - कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी पुखराज, कुफरी सूर्या, कुफरी खाती, कुफरी बहार और कुफरी अशोक और मुख्य किस्में जैसे कुफरी बहार, कुफरी आनंद, कुफरी बादशाह, कुफरी सिंदुरी, कुफरी सतलज, कुफरी सदाबहार लालिमा, कुफरी अरुण, कुफरी और कुफरी पुखराज, कुफरी गारिम, कुफरी लीमा, कुफरी ललित, कुफरी संगम, कुफरी नीलकंठ, कुफरी गंगा, कुफरी थार-3, कुफरी मोहन, कुफरी नीलकंठ, कुफरी सूर्या, कुफरी चिप्सोना-1, कुफरी चिप्सोना-3, कुफरी चिप्सोना-4, कुफ़री फ़्रीसोना आदि और आलू की फसल की बुआई पूरी करने का प्रयास करें। आलू की फसल में चिकन पॉक्स से बचाव के लिए 10 लीटर पानी में 100 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन या बोरिक एसिड मिलाकर बीजों पर कंदों का छिड़काव करें तथा अंकुरित बीजों को उपचारित न करें।
पशुपालन:
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे गर्भवती भैंसों/गायों को ढलान वाले स्थानों पर न बांधें। गर्भवती भैंस/गाय को पौष्टिक चारा व अनाज खिलाएं तथा नवजात शिशु को तीन दिन तक कोलोस्ट्रम खिलाएं। पशुओं को साफ-सुथरी जगह पर रखें। पशुओं को गला घोटू से बचाने के लिए टीकाकरण अवश्य कराएं। बदलते मौसम को देखते हुए रात के समय पशुओं को खुले स्थानों पर न बांधें तथा पशुओं के स्वास्थ्य एवं बीमारी का ध्यान रखना सुनिश्चित करें। पशुओं को हरे एवं सूखे चारे के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में अनाज उपलब्ध करायें। पशुओं को दिन में 3-4 बार साफ एवं ताजा पानी अवश्य पिलायें।

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