फतेहपुर का मौसम दिनांक 07 फरवरी से 11 फरवरी 2024

सियासत पर नजर, फतेहपुर 
मौसम पूर्वानुमान ( वैधता: दिनांक 07 फ़रवरी, 2024 से 11 फ़रवरी , 2024 तक)
(वसीम खान, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि मौसम विज्ञान,
कृषि विज्ञान केंद्र, फतेहपुर
(ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)
(हर खबर पर हमारी पकड़)
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 5 दिनों में फतेहपुर जिले में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने की संभावना रहेगी। लेकिन इससे बारिश की संभावना नहीं रहेगी। अधिकतम तापमान 23.0 से 26.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा जबकि न्यूनतम तापमान 6.0 से 9.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा। हवा की दिशा अधिकतर उत्तर-पश्चिमी से उत्तर-पूर्वी होगी और हवा की गति सामान्य बने रहने की संभावना हैं।

किसानों को सलाह दी जाती है कि वे गेहूं की फसल में नाइट्रोजन की टॉपड्रेसिंग करें और जायद मक्का और सब्जियों की बुआई के लिए खेत तैयार करें। कीटनाशकों, कीटनाशकों और खरपतवारनाशी रसायनों के लिए उपकरणों को अलग करें या साफ पानी से धोकर ही उपयोग करें और हवा की विपरीत दिशा में खड़े कीटनाशकों, कीटनाशकों और खरपतवारनाशी रसायनों का छिड़काव या छिड़काव न करें। छिड़काव दोपहर में करना चाहिए, यदि संभव हो तो छिड़काव के बाद खाने से पहले और कपड़े धोने के बाद हाथों को साबुन या हैंड वॉश से अच्छी तरह धोना चाहिए।
फ़सल संबंधित सलाह:
• पिछले सप्ताह हुई बारिश का फायदा उठाते हुए किसानों को चाहिए कि वे ओट आते ही अपने खेतों में यूरिया की टॉपड्रेसिंग करें। यदि देर से बोई गई गेहूं की फसल में संकरी और चौड़ी पत्ती वाले दोनों प्रकार के खरपतवार दिखाई दें तो पहली सिंचाई के बाद सल्फोसल्फ्यूरान 75% डब्लूपी 33 ग्राम/हेक्टेयर या मैट्रीब्यूजिन 70% डब्लूपी 250 ग्राम/हेक्टेयर डालें। 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
• सरसों की फसल में माहूँ और चित्रित बग कीट का प्रकोप के रोकथाम के लिए आसमान साफ होने पर नीम आयल 3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी मे घोलकर छिड़़काव करे या फिर इमिडाक्लोप्रिड @ 1 मिली/3 लीटर पानी के घोल का छिड़काव करें।
• मटर की फसल में फली छेदक कीट का प्रकोप होने की संभावना रहती है अत: इसकी रोकथाम के लिए क्यूनालफॉस 25 ईसी 2 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
• चने की फली छेदक कीट के जैविक नियंत्रण के लिए किसान फरवरी माह में प्रति हेक्टेयर 5 से 6 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। यदि प्रकोप ज्यादा दिखाई दे तो, एनपीवी 250 एलई 1 मिलीलीटर दवा प्रति लीटर पानी मे घोल बनाकर स्प्रे करें।15 दिनों के बाद, बीटी 750 मिली लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़़काव करे या 700 मिलीलीटर नीम का तेल प्रति हेक्टेयर घोल बनाकर छिड़़काव करे। रासायनिक नियंत्रण के लिए इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी को 1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से या एमेमेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से स्प्रे करें।
• बढ़ती आर्द्रता/बादलयुक्त वातावरण तथा गिरते तापमान के कारण आलू की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप तेजी से होता है, अत: इसकी रोकथाम के लिए मैंकोजेब या रिडोमिल 2.5 ग्राम/लीटर पानी या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3.0 ग्राम/लीटर पानी में घोलें। घोल बनाकर 12-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।
• आम के बागों में कीट एवं मैंगो हॉपर कीट के प्रकोप की संभावना रहती है, अत: इसकी रोकथाम के लिए क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी 2.0 मिली या फेनिट्रोथियन 50 ईसी 3.0 मिली/लीटर पानी में छिड़काव करें। आम के पेड़ों को साफ करें तथा सूखी एवं रोगग्रस्त टहनियों को काट लें। बेर के फलों को गिरने से बचाने के लिए साफ आसमान में सुपर 6 हार्मोन 1.0 मिली प्रति 4.5 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
पशुपालन:
• वर्तमान मौसम को देखते हुए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे पशुओं को ठंड से बचाने के लिए सुबह और शाम को झूल डालें, रात के समय अपने पशुओं को खुले में रखें और रात के समय खिड़कियों और दरवाजों पर जूट के बोरे के पर्दे लगाएं और हटा दें। दिन के समय पर्दों को धूप में रखें। पशुओं को हरा व सूखा चारा पर्याप्त मात्रा में दाना दें। पशुओं को दिन में 3-4 बार ताजा एवं ताजा पानी अवश्य पिलाना चाहिए। पशुओं को साफ-सुथरी जगह पर रखें।

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