सियासत पर नजर, फतेहपुर
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फतेहपुर का मौसम दिनांक 03 अगस्त से 07 अगस्त 2024
मौसम पूर्वानुमान ( वैधता: दिनांक 03 अगस्त, 2024 से 07 अगस्त, 2024 तक)
• भारतीय मौसम विभाग ने पूर्वानुमान लगाया है कि 03 अगस्त से 07 अगस्त तक फतेहपुर जिले में मध्यम से घने बादल छाए रहेंगे, इस दौरान गरज/बिजली चमकने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।
• अधिकतम तापमान 32.0 से 35.0 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 22.0 से 23.0 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। हवा की दिशा दक्षिण-पूर्वी से उत्तर-पूर्वी रहने की उम्मीद है, हवा की गति सामान्य से तेज़ होगी।
• किसानों को चाहिए कि वे तैयार धान की पौध को जल्द से जल्द रोपने को प्राथमिकता दें। बारिश की संभावना के कारण सिंचाई और बुवाई का काम स्थगित रखें। पशुओं को सुबह-शाम नहलाएं, उन्हें छायादार स्थान पर रखें और दिन में 3-4 बार पानी पिलाएं।
कीटनाशक, पेस्टीसाइड और खरपतवारनाशक रसायनों का उपयोग करते समय, उपकरणों को धोने के लिए केवल साफ पानी का उपयोग करें और हवा के विपरीत दिशा में छिड़काव करने से बचें। यदि संभव हो तो शाम को छिड़काव करें और छिड़काव के बाद, खाने या कपड़े छूने से पहले साबुन से अच्छी तरह हाथ अवश्य धोएं।*
फ़सल संबंधित सलाह:
• धान की फसल में चौड़ी व संकरी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए बिसपायरीबैक सोडियम 10%SC को 0.20 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई के 15-20 दिन बाद 500-600 लीटर पानी में मिलाकर उचित आर्द्रता पर प्रयोग करें। यदि धान में खैरा रोग लग जाए तो इसके नियंत्रण के लिए 20-25 किलोग्राम जिंक सल्फेट व 2.5 किलोग्राम चूने का 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। धान की रोपाई के 25 से 30 दिन बाद 50 से 60 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर की दर से टॉप ड्रेसिंग करें। टॉप ड्रेसिंग से पहले खरपतवार निकालना न भूलें तथा टॉप ड्रेसिंग के दौरान खेत में 2 से 3 सेमी से अधिक पानी न हो। यदि धान की फसल में जड़ कृमि कीट का प्रकोप हो तो कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4% दानेदार रसायन 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से तीन से चार सेमी स्थिर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
• कृपया संभावित वर्षा की स्थिति में सिंचाई कार्य में विलम्ब करें। मूंगफली की फसल की बुवाई के 20 से 25 दिन बाद निराई-गुड़ाई कर 100 किलोग्राम जिप्सम प्रति हेक्टेयर की दर से डालकर हल्की गुड़ाई करें। मूंगफली की फसल में सफेद ग्रब/दीमक का प्रकोप होने की सम्भावना रहती है, अतः इसकी रोकथाम के लिए फिप्रोनिल 0.3% जी.आर. का 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
• वर्षा की संभावना को देखते हुए सिंचाई कार्य स्थगित रखें। ज्वार की फसल की निराई-गुड़ाई आसमान साफ होने के 15-20 दिन बाद करें। ज्वार की फसल में तना छेदक/तना मक्खी कीट का प्रकोप होने की संभावना है, इसलिए रोकथाम के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 4 ग्राम/हेक्टेयर या डायमेथोएट 30% ईसी 1.0 लीटर/हेक्टेयर को 600-700 लीटर पानी के घोल में मिलाकर डालें। साफ मौसम में डालें।
• वर्षा की संभावना को देखते हुए सिंचाई कार्य स्थगित रखें। तिल की फसल में पहली निराई बुवाई के 15-20 दिन बाद करनी चाहिए।
• यदि वर्षा न हो तो बुवाई, रोपण तथा निराई/गुड़ाई के कार्य पर ध्यान दें। खरीफ में बोई जाने वाली बैंगन, मिर्च, टमाटर तथा अगेती फूलगोभी जैसी फसलों के लिए नर्सरी तैयार करें तथा रोपाई के लिए पौध तैयार करें। सब्जी की फसलों में फल छेदक/पत्ती छेदक कीटों की रोकथाम के लिए 1.5-2.0 मिली लीटर नीम तेल प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर 8-10 दिन के अंतराल पर 3-4 बार छिड़काव करें। जब आसमान साफ हो तो खड़ी सब्जी की फसलों में निराई-गुड़ाई अवश्य करें।
• आम के पौधों के लिए निर्धारित गड्ढों में नए पेड़ लगाएँ। आम के पत्तों पर लगने वाले कीट से बचाव के लिए आसमान साफ होने पर 2% कार्बोफ्यूरान और 1.5% धूल का मिश्रण डालें। केले या पपीते के बगीचे में निराई-गुड़ाई करने के बाद तने के चारों ओर 25-30 सेमी ऊँचे मिट्टी के टीले बनाएँ और केले के पौधों को सहारा दें।
पशुपालन:
• किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पशुओं को साफ-सुथरे वातावरण में रखें और उन्हें ततैयों और मच्छरों से बचाने के लिए नीम के पत्तों का इस्तेमाल करें। सुनिश्चित करें कि पशुशाला के आसपास बारिश का पानी जमा न हो। पशुओं को पर्याप्त मात्रा में अनाज, हरा और सूखा चारा दें। लीवर फ्लू की दवा दें और गला घोंटने और लंगड़े बुखार के लिए पशुओं को टीके लगवाएं। बाहरी परजीवियों के लिए दवा लगाएँ। दिन के समय पशुओं को छायादार जगह पर रखें, लेकिन इस सप्ताह तेज़ हवाओं के कारण उन्हें पेड़ों के नीचे न बाँधें, क्योंकि इससे पेड़ या शाखाएँ गिर सकती हैं। पशुओं को दिन में 3-4 बार साफ और ताज़ा पानी ज़रूर दें।
(ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)

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