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जब पुलिसकर्मी को सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़े: अमौली में बाइक चोरी का मामला
फतेहपुर 27 नवम्बर, 2024
सोचिए, जब एक पुलिसकर्मी को अपनी चोरी हुई बाइक के लिए न्याय पाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़े, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलता होगा? ऐसा ही एक मामला फतेहपुर जिले के अमौली कस्बे में सामने आया, जहां एक सिपाही की बाइक चोरी हो गई।
बाइक चोरी का यह मामला न केवल पुलिस के अंदरूनी तंत्र की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि न्याय पाने के लिए एक पुलिसकर्मी को भी वही संघर्ष करना पड़ता है, जो आम नागरिक करते हैं।
क्या हुआ था?
महोबा जिले में तैनात सिपाही की बाइक चोरी उस वक्त हुई जब उसका बड़ा भाई एक शादी में फतेहपुर के अमौली कस्बे आया हुआ था। बाइक एक गेस्ट हाउस के बाहर खड़ी थी, जहां से यह गायब हो गई। सिपाही ने तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क किया, लेकिन पहले तो मामले को दर्ज करने में देरी हुई।
हालांकि, हफ्ते भर बाद एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई। यह देखकर सिपाही ने गुस्से में एक वीडियो बनाया और इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
चौकी प्रभारी पर गंभीर आरोप
पीड़ित सिपाही का आरोप है कि अमौली चौकी प्रभारी चोरी की गई बाइक की तलाश में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इसके बजाय, वे गेस्ट हाउस मालिक से मेलजोल में व्यस्त रहते हैं। सिपाही का कहना है कि यह न केवल उनकी जिम्मेदारी की अनदेखी है, बल्कि मामले की जांच को जानबूझकर कमजोर करने की कोशिश भी हो सकती है।
जब पुलिसकर्मी ही न्याय से वंचित हो...
वीडियो वायरल होने के बाद सिपाही ने कहा, "जब हमें, जो खुद सिस्टम का हिस्सा हैं, अपनी आवाज उठाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ रहा है, तो आम आदमी के लिए न्याय मिलना कितना मुश्किल होगा?"
इस बयान ने पुलिस प्रशासन और उसके कामकाज की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनता का गुस्सा और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होते ही यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। लोग चौकी प्रभारी की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं और फतेहपुर पुलिस की निष्क्रियता पर नाराजगी जता रहे हैं।
कई स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब अमौली चौकी प्रभारी विवादों में आए हैं। इससे पहले भी उन पर लापरवाही और पक्षपात के आरोप लग चुके हैं।
क्या होगा अब?
घटना के बाद फतेहपुर पुलिस ने मामले की जांच शुरू करने का दावा किया है। हालांकि, सिपाही और उसके परिवार का कहना है कि वे इस बात को लेकर संशय में हैं कि जांच निष्पक्ष होगी।
यह घटना न केवल फतेहपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सिस्टम में आम आदमी और पुलिसकर्मी के बीच का फर्क कितना कम है जब न्याय की बात आती है।
अब देखना होगा कि यह मामला चर्चा में आने के बाद क्या अमौली चौकी प्रभारी कोई ठोस कदम उठाते हैं, या यह भी सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सिमटकर रह जाता है।
(ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)

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