सियासत पर नजर, फतेहपुर
(हर खबर पर हमारी पकड़)
फतेहपुर जिला अस्पताल में कमीशनखोरी का खेल: मरीज से 800 के इंजेक्शन की वसूली
फतेहपुर जिला अस्पताल एक बार फिर अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार के कारण सुर्खियों में है। बीते दिन कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने अस्पताल का निरीक्षण कर कर्मचारियों की लापरवाही पर जमकर फटकार लगाई थी, लेकिन इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा।
ताजा मामला मुचुवापुर निवासी कुलदीप कुमार का है, जिनका एक्सीडेंट भदवा गांव के पास हुआ। उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ट्रॉमा सेंटर लाया गया। इलाज के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटर सागर ने मरीज के परिजनों पर दबाव बनाकर 800 रुपये का इंजेक्शन मंगवाया। यही नहीं, इंजेक्शन लाने के लिए उसने एक निजी मेडिकल स्टोर का नाम भी बताया।
👉 कमीशनखोरी का खेल कैसे चलता है?
जिस इंजेक्शन को मरीज के परिजनों से ₹800 में दिलवाया गया, उसकी वास्तविक कीमत ₹80 से ₹150 के बीच होती है।
महंगे दाम पर बिकवाने के बाद स्टाफ इंजेक्शन की डिब्बी का कैप लेकर मेडिकल स्टोर वापस जाता है।
वहां से उसे 50% तक कमीशन मिल जाता है।
यानी गरीब मरीज से वसूले गए पैसों का सीधा फायदा अस्पताल स्टाफ और मेडिकल माफिया को पहुंचता है।
👉 परिजनों की पीड़ा:
मरीज के जीजा जय सिंह ने बताया,
"हम घबराए हुए थे, कुछ समझ नहीं आ रहा था। सागर ने कहा कि तुरंत 800 रुपये का इंजेक्शन मंगवाओ, इससे मरीज ठीक हो जाएगा। मजबूरी में हमें उसकी बात माननी पड़ी।"
👉 प्रशासन पर सवाल:
यह घटना साबित करती है कि मंत्री की फटकार का कोई असर जमीनी स्तर पर नहीं हुआ। जिला अस्पताल की व्यवस्था अभी भी कमीशनखोरी और मरीजों की लूट पर टिकी हुई है।
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और दवा की सुविधा उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं।
लेकिन हकीकत में मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर किया जाता है।
ट्रॉमा सेंटर जैसे गंभीर यूनिट में भी यदि इस तरह का भ्रष्टाचार हो रहा है, तो आम मरीज की स्थिति और भी दयनीय हो जाती है।
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को इस पर तुरंत कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, वरना यह व्यवस्था मरीजों की जान से खिलवाड़ करती रहेगी।
(न्यूज़ डेस्क फतेहपुर, 9936330179)


0 टिप्पणियाँ