फतेहपुर का मौसम (दिनांक 01 नवंबर से 05 नवंबर 2023)

सियासत पर नजर, फतेहपुर
मौसम पूर्वानुमान ( वैधता: दिनांक 01 नवंबर, 2023 से 05 नवंबर , 2023 तक)
वसीम खान, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि मौसम विज्ञान,
कृषि विज्ञान केंद्र, फतेहपुर
(यश द्विवेदी, ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)
(हर खबर पर हमारी पकड़)
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 5 दिनों में फतेहपुर जिले में दिनांक 01 नवंबर को हल्के से मध्यम बादल छाए रहने की संभावना रहेगी। लेकिन इसके कारण वर्षा की कोई संभावना नहीं रहेगी। इसके अलावा बाकि दिनों में मौसम साफ़ रहेगा। अधिकतम तापमान 32.0 से 33.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा जबकि न्यूनतम तापमान 16.0 से 17.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा। हवा की दिशा अधिकतर उत्तर-पूर्वी से दक्षिण पूर्वी रहेगी और हवा की गति सामान्य बने रहने की संभावना हैं।

किसानों को सलाह है कि वे धान, मक्का, तिल आदि की पकी हुई फसलों की कटाई एवं मड़ाई कर अनाज को संरक्षित कर लें। सरसों, चना, मटर एवं आलू आदि की बुआई के लिए मौसम अनुकूल हैं। रबी मौसम में बोई जाने वाली फसलें जैसे चना, मटर, मसूर, सरसों एवं अलसी आदि की बुआई बीजोपचार के बाद ही करनी चाहिए। पशुओं को सुबह-शाम नहलाएं, छायादार स्थान पर रखें, पानी दें 3-4 बार। कीटनाशकों, शाकनाशियों और खरपतवारनाशकों के लिए उपकरणों को धोने के लिए केवल साफ पानी का उपयोग करें और हवा की विपरीत दिशा में खड़े होकर कीटनाशकों, कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों का छिड़काव न करें। छिड़काव शाम को करना चाहिए; यदि संभव हो तो छिड़काव के बाद, खाने से पहले और कपड़े धोने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए।
फ़सल संबंधित सलाह:
धान की बालियों में 85 प्रतिशत सुनहरा रंग दिखाई देने पर फसल की कटाई करें तथा कटाई के बाद बालों को धूप में सुखा लें तथा मौसम साफ होने पर मड़ाई करें। वर्तमान मौसम कीटों के लिए अनुकूल है, अतः धान की फसल में फूल आने के बाद औसतन 2 - 3 गंधी कीट/हिल दिखाई देते हैं, तो इसके नियंत्रण के लिए इमिडाकोलोरोप्रिड 17. 8% एसएल 350 मिली/हेक्टेयर या बुरफोजिन 25% एसपी 750 मि.ली./हेक्टेयर की दर से 500 -600 लीटर पानी में घोल बनाकर मौसम साफ होने पर छिड़काव करें।
मूंगफली की फसल की खुदाई तभी करनी चाहिए जब छिलके के ऊपर की नसें उभर आएं और अंदर का भाग भूरे रंग का हो जाए तथा मूंगफली गुलाबी हो जाए। मूंगफली की कटाई के बाद फलियों को धूप में अच्छी तरह सुखाकर भंडारण कर लें।
•  उड़द/मूंग की पकी हुई फसल की कटाई एवं मड़ाई के लिए मौसम अनुकूल है तथा मड़ाई के बाद बीजों को धूप में अच्छी तरह सुखाकर भण्डारण करें।
तोरिया की फसल में बालों वाली इल्ली का प्रकोप होने की संभावना रहती है इसलिए इसकी रोकथाम के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 200 ग्राम/हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। तोरिया की फसल की बुआई के 20-22वें दिन पौधे से पौधे की दूरी 10-22 सेंटीमीटर के अंदर निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। तोरिया की फसल में पहली सिंचाई बुआई के 25-30 दिन के अन्दर करनी चाहिए तथा जई आने पर 108 किग्रा/हेक्टेयर की दर से यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करें।
सरसों की फसल में आरा मक्खी - ये कीट अंकुरण के 7 से 10 दिन में अधिक हानि पहुंचाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत या मैलाथियान 5 प्रतिशत या कार्बारिल 5 प्रतिशत का चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह या शाम को दें। राई/सरसों की किसी भी प्रजाति की बुआई के लिए अनुशंसित प्रजातियाँ- बरुना, रोहिणी, नरेन्द्र राय- 8501, माया, वैभव आदि की बुआई 4-5 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर की दर से मौसम साफ होने पर करें।
मटर की फसल की किसी भी अनुशंसित किस्म - रचना, मालवीय मटर-15, सपना आदि की बुआई के लिए 100-125 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर की दर से बुआई करें।
चने की किसी भी किस्म की बुआई के लिए फसल अनुशंसित प्रजातियाँ- आवारोधी, पूसा256, पूसा-362, के.डब्लू.आर-108, के-850, के.डी.जी.-1168 आदि। छोटे दाने वाले बीज 75-80 किग्रा/हेक्टेयर। बड़े दाने वाले बीज के लिए 90-100 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर की दर से बुआई करें।
टमाटर, प्याज, फूलगोभी और पत्तागोभी की नर्सरी डालें और तैयार पौधों को मेड़ों पर रोपें। यदि सब्जी की फसलों में फल छेदक/पत्ती छेदक कीट का प्रकोप दिखाई दे तो इसके नियंत्रण के लिए नीम के तेल को 1.5 मिली/लीटर पानी में घोल बनाकर 8-10 दिन के अंतराल पर 3-4 छिड़काव करें। सब्जी मटर, मूली, गाजर, सौंफ, अजवाइन, चुकंदर, लहसुन, धनिया, पालक, सोया और मेथी की बुआई शुरू करें। आलू की बुआई के लिए खेत तैयार करें।
आलू की प्रारंभिक किस्में - कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी पुखराज, कुफरी सूर्या, कुफरी खाती, कुफरी बहार और कुफरी अशोक और मुख्य किस्में जैसे कुफरी बहार, कुफरी आनंद, कुफरी बादशाह, कुफरी सिंदुरी, कुफरी सतलुज, कुफरी सदाबहार लालिमा, कुफरी अरुण, कुफरी और कुफरी पुखराज, कुफरी गारिम, कुफरी लीमा, कुफरी ललित, कुफरी संगम, कुफरी नीलकंठ, कुफरी गंगा, कुफरी थार-3, कुफरी मोहन, कुफरी नीलकंठ, कुफरी सूर्या, कुफरी चिप्सोना-1, कुफरी चिप्सोना-3, कुफरी चिप्सोना-4 और कुफरी, फ्रिसोना आदि की बुआई के लिए मौसम अनुकूल है। आलू की फसल में चेचक रोग की रोकथाम के लिए नियंत्रण के लिए 10 लीटर पानी में 100 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन या बोरिक एसिड मिलाकर बीजों पर छिड़काव करना चाहिए तथा अंकुरित बीजों को उपचारित नहीं करना चाहिए।
पशुपालन:
किसानों को सलाह दी जाती है कि गर्भवती भैंसों/गायों को ढलान पर न बांधें, गर्भवती भैंसों/गायों को पौष्टिक चारा खिलाएं तथा नवजात बच्चे को तीन दिन तक दूध पिलाएं। मक्खी-मच्छरों से बचाव के लिए पशुओं को साफ-सुथरी जगह पर रखें तथा धुंआ दें। पशुओं में मुंहपका रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण कराएं। इस रोग से पीड़ित पशुओं को अपने घावों को पोटैशियम परमैंगनेट से धोना चाहिए। पशुओं को हरे व सूखे चारे के साथ पर्याप्त मात्रा में अनाज दें। तालाबों या अन्य स्थानों का रुका हुआ पानी न दें, इससे पशुओं को लिवर फ्लू और पेट में कीड़े होने का खतरा रहता है। पशुओं को दिन में 3-4 बार साफ एवं ताजा पानी अवश्य पिलायें।

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