भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 5 दिनों में फतेहपुर जिले में हल्के बादल छाए रहने की संभावना रहेगी। लेकिन इसके कारण बारिश की संभावना नहीं रहेगी परंतु लू चलने की संभावना रहेगी। अधिकतम तापमान 43.0 से 46.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा जबकि न्यूनतम तापमान 27.0 से 30.0 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा। हवा की दिशा अधिकतर उत्तर-पश्चिमी होगी और हवा की गति सामान्य से तेज बने रहने की संभावना हैं।
• मक्के की फसल जीरा निकालने/भुट्टे बनने/दाने भरने की अवस्था में चल रही है जो नमी की कमी के प्रति संवेदनशील है। अत: आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई कर उचित नमी बनाये रखें। मक्के की फसल में तना छेदक/शूट मक्खी कीट का प्रकोप होने की संभावना रहती है अत: इसकी रोकथाम के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 200 ग्राम/हेक्टेयर या डाइमेथोएट 30% ईसी 1.0 ली/हेक्टेयर की दर से 600-700 में घोल बनाकर प्रयोग करें। लीटर पानी का एक स्प्रे बनाएं।
• उड़द और मूंग की फसल में फली छेदक कीट का प्रकोप होने की संभावना रहती है अत: इसकी रोकथाम के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 200 ग्राम/हेक्टेयर या डाइमेथोएट 30% ईसी का प्रयोग करें। 1.0 लीटर/हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर आसमान साफ होने पर छिड़काव करें।
• धान के खेतों की तैयारी के लिए गहरी जुताई और बाड़बंदी करें. धान की नर्सरी लगाने से 15 दिन पहले खेत की हल्की सिंचाई करें ताकि खेत तैयार करते समय खेत में निकलने वाले खरपतवार नष्ट हो जाएं।
• तैयार फसलें जैसे कद्दू, लौकी, तरोई, करेला, खीरा, ककड़ी, तरबूज और खरबूज आदि की कटाई करें और उन्हें बाजार में भेजें। सब्जियों की फसलों में फल छेदक/पत्ती छेदक कीट की रोकथाम के लिए नीम के तेल को 1.5-2.0 मिली/लीटर पानी में घोल बनाकर 8 -10 दिन के अंतराल पर 3-4 छिड़काव करें। सब्जियों की खड़ी फसल में निराई-गुड़ाई करें तथा शाम के समय 8-10 दिन के अंतराल पर सिंचाई का कार्य करें।
• नए बगीचे लगाने के लिए गड्ढे खोदें. आम, अमरूद, नींबू बेर, अंगूर, पपीता और लीची आदि के बगीचों में सिंचाई कार्य करें। आम के फलों को गिरने से रोकने के लिए बगीचों में सिंचाई करें या 20 मिलीलीटर अल्फा नेफ़थलीन एसिटिक एसिड की 4.5 एसएल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। यह। आम की फली में कोयल विकार या आंतरिक सड़न रोग की रोकथाम के लिए बोरेक्स 0.8% को 0.8 ग्राम/लीटर पानी में घोल बनाकर 10 दिन के अंतराल पर 2 छिड़काव करें।
पशुपालन:
• वर्तमान मौसम को देखते हुए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे रात के समय पशुओं को खुले में बांधें। दिन के समय पशुओं को छायादार स्थान पर बांधें। जानवरों को पेड़ के नीचे न बांधें क्योंकि इस सप्ताह हवाओं की गति के कारण पेड़ों की टहनियाँ गिरने की संभावना अधिक है। पशुओं के खुरपका-मुंहपका रोग की रोकथाम के लिए एफएमडी तथा लैगडिया बुखार की रोकथाम के लिए वीक्यू। पशुओं को हरा व सूखा चारा पर्याप्त मात्रा में दाना दें। पशुओं को दिन में 3-4 बार साफ एवं ताजा पानी अवश्य पिलाना चाहिए। गर्भवती पशुओं को ढलान वाले स्थान पर न बांधें। पशुओं के पेट में कीड़ों की रोकथाम के लिए कृमिनाशक दवा देने का सर्वोत्तम समय है।
(ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)

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