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गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में मनाया गया श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व
फतेहपुर 04 सितंबर, 2024
गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी फतेहपुर सदर स्थित गुरुद्वारा में श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश पर्व बड़े ही धूमधाम से सिख समुदाय द्वारा मनाया गया।
विस्तृत जानकारी देते हुए ज्ञानी गुरुवचन सिंह ने बताया, श्री गुरु ग्रंथ साहिब गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में मनाया गया गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व का समागम।
ज्ञानी गुरुवचन सिंह ने बताया, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व हर साल भादो महीने में मनाया जाता है, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सिख समुदाय का एक प्रमुख व पवित्र धर्मग्रंथ है। जिसे सिखों के पांचवें गुरु, गुरु अर्जन देव जी ने पहली बार साल 1604 में दरबार साहिब में प्रकाशमान किया था। बाद में सिख धर्म के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी ने एक आदेश जारी किया कि अब से सिख लोग गुरु ग्रंथ साहिब जी को अपना गुरु मानेंगे और कोई देहधारी गुरु नहीं होगा।
'आज्ञा भई अकाल की तवे चलायो पंथ'
'सब सिखन को हुकुम है, गुरु मान्यो ग्रंथ'
तभी से गुरु ग्रंथ साहिब सिख पंथ का शब्द गुरु बन गया, आज के दिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के रखे गए साप्ताहिक पाठ की समाप्ति हुई और संगत द्वारा विगत वर्ष रखे गए गुरुग्रंथ साहिब के पाठ की समाप्ति व आरम्भता हुई।
आरम्भ हुए पाठ की समाप्ति अगले साल होगी, आज पाठ की समाप्ति के उपरांत गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा में कीर्तन, अरदास हुई, जिसके बाद ज्ञानी जी द्वारा गुरु ग्रंथ साहिब जी के बारे में बताया गया, उसके बाद सामूहिक लंगर का आयोजन हुआ। यह सारा कार्यक्रम गुरूद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान सेवक सरदार चरनजीत सिंह एवम कमेटी के सदस्यों व संगत के सहयोग से आयोजित किया गया।
इस अवसर पर जतिंदर पाल सिंह, सुरिंदर सिंह, सन्तोष सिंह, परमजीत सिंह, वरिंदर सिंह, परमिंदर सिंह, गुरमीत सिंह, अर्शित, व महिलाओं में मंजीत कौर, हरविंदर कौर, सतबीर कौर, जसपाल कौर, तरुनप्रीत कौर, खुशी व अन्य भक्त जन उपस्थित रहे।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व का उत्सव सिख समुदाय की उनके पवित्र ग्रंथ के प्रति गहरी श्रद्धा को दर्शाता है। यह आयोजन भादों महीने में प्रतिवर्ष मनाया जाता है, जो गुरु अर्जन देव जी की शिक्षाओं और गुरु गोबिंद सिंह जी के उस आदेश को प्रतिबिंबित करता है जिसमें उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का शाश्वत गुरु घोषित किया था। इस आयोजन में गुरु ग्रंथ साहिब के एक वर्ष तक चले पाठ का समापन और नए पाठ का आरंभ हुआ, जो निरंतरता और भक्ति का प्रतीक है। इस समारोह में पुरुषों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सिख धार्मिक परंपराओं की समावेशी प्रकृति को रेखांकित करती है। कीर्तन, अरदास और लंगर जैसे कार्यक्रमों ने सामुदायिक सेवा और समानता के मूल्यों को और भी सशक्त किया।
(ब्यूरो चीफ फतेहपुर, 9936330179)




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