सियासत पर नजर, फतेहपुर
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बिजली बिल माफी योजना: कागज़ों में राहत, फतेहपुर में ज़मीनी हकीकत बनी परेशानी
फतेहपुर।
यूपीपीसीएल द्वारा जिले में लागू की गई बिजली बिल माफी की एकमुश्त समाधान योजना अब राहत कम और परेशानी ज़्यादा साबित हो रही है। जिस योजना को सरकार ने गरीब, मध्यम वर्ग और किसानों के लिए संजीवनी बताया था, वही योजना तकनीकी खामियों, जटिल नियमों और विभागीय लापरवाही के कारण दम तोड़ती नजर आ रही है।
योजना के तहत ब्याज माफी और मूलधन में 25 प्रतिशत तक की छूट का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। हजारों उपभोक्ता “आर नॉट एलिजिबल”, “आउटलायर”, “डेटा शो नहीं कर रहा” जैसे संदेशों में उलझकर बिजली उपकेंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक राधानगर, आबूनगर, बिंदकी, चौड़ागरा, खागा और जहानाबाद जैसे इलाकों में सुबह से ही बिजली कार्यालयों पर लंबी कतारें लग रही हैं। उपभोक्ता उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन कभी सर्वर डाउन, कभी साइट स्लो, तो कभी कर्मचारी के न होने का बहाना सामने आता है।
ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए यह योजना और भी पेचीदा बन गई है। प्रचार केवल कागज़ों और वेबसाइटों तक सीमित है। किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को न तो छूट की सही जानकारी दी गई और न ही स्पष्ट प्रक्रिया समझाई गई। केंद्रों पर पहुंचने पर नियमों की लंबी सूची थमा दी जाती है और अंततः पूरी रकम जमा करने का दबाव बनाया जाता है।
मीटर रीडिंग और वास्तविक खपत में भारी अंतर ने उपभोक्ताओं का भरोसा तोड़ दिया है। घोस्ट बिलिंग, गलत रीडिंग और स्टोर आईडी की गड़बड़ियों की शिकायतें महीनों से लंबित हैं। जिन उपभोक्ताओं के बिल ही गलत हैं, वे योजना का लाभ कैसे लें—इसका कोई जवाब विभाग के पास नहीं है।
किस्तों में भुगतान की व्यवस्था भी राहत के बजाय सजा बन गई है। एक भी किस्त देर होने पर पूरा पंजीकरण स्वतः रद्द हो जाता है। बेरोजगारी, बीमारी और पारिवारिक संकट से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए यह शर्त बेहद कठोर साबित हो रही है।
सिविल लाइंस स्थित बिजली कार्यालय में खड़े बुजुर्ग, महिलाएं और किसान एक ही बात कहते दिखते हैं—“सरकार कागजों में बिल माफ कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में समय, पैसा और अपमान खर्च हो रहा है।”
यदि समय रहते विशेष कैंप, तकनीकी सहायता और शिकायतों का त्वरित निस्तारण होता, तो हालात इतने बदतर न होते।
अब सवाल यह नहीं कि योजना में कितनी छूट है, बल्कि यह है कि जब पात्र उपभोक्ता ही वंचित रह जाएं, तो ऐसी योजना का उद्देश्य क्या रह जाता है? यदि प्रशासन ने शीघ्र सुधार नहीं किया, तो यह योजना फतेहपुर में राहत नहीं, बल्कि असफलता की मिसाल बनकर रह जाएगी।
(न्यूज़ डेस्क फतेहपुर, 9936330179)

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