सियासत पर नजर, फतेहपुर
(हर खबर पर हमारी पकड़)
यूपी में जुर्म को नहीं मिलेगी छूट: योगी सरकार ने मदरसा शिक्षक वेतन विधेयक 2016 वापस लिया
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को और सख्त करने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में वर्ष 2016 के उत्तर प्रदेश मदरसा (अध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान) विधेयक को पूरी तरह वापस लेने का निर्णय लिया गया।
यह विधेयक समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में पारित हुआ था। योगी सरकार का कहना है कि इस विधेयक के कुछ प्रावधान संविधान की मूल भावना के खिलाफ थे और इससे मदरसा शिक्षकों व कर्मचारियों को सामान्य कानून से अलग विशेष छूट मिल रही थी।
🔍 क्या था 2016 का मदरसा विधेयक?
वर्ष 2016 में लाया गया यह विधेयक मदरसा शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान से संबंधित था, लेकिन इसमें ऐसे प्रावधान शामिल थे, जिनके चलते मदरसों में प्रशासनिक जांच या पुलिस कार्रवाई में बाधा उत्पन्न हो सकती थी। यही कारण था कि इसे संवैधानिक रूप से आपत्तिजनक माना गया।
इस विधेयक को दोनों सदनों से पारित होने के बाद तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने राष्ट्रपति के पास भेज दिया था। राष्ट्रपति ने भी इसमें कानूनी खामियां बताते हुए विधेयक को वापस लौटा दिया था।
⚖️ विधेयक वापसी के बाद क्या बदलेगा?
विधेयक वापस लिए जाने के बाद अब मदरसा शिक्षकों और कर्मचारियों पर भी वही कानून लागू होंगे, जो प्रदेश के अन्य नागरिकों पर लागू होते हैं। यदि कोई मदरसा शिक्षक या कर्मचारी अपराध करता है, तो उसके खिलाफ जांच और पुलिस कार्रवाई में अब कोई कानूनी बाधा नहीं होगी।
🗣️ योगी सरकार का स्पष्ट संदेश:
योगी सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। चाहे कोई भी हो, यदि अपराध करेगा तो उस पर कार्रवाई तय है। सरकार का मानना है कि यह फैसला प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और संविधान के अनुरूप शासन सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
यह निर्णय एक बार फिर यह दर्शाता है कि योगी सरकार अपराध, माफिया और कानून से छूट के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
(न्यूज़ डेस्क फतेहपुर/लखनऊ, 9936330179)

0 टिप्पणियाँ